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Monday, July 30, 2012

रक्षाबंधन - राष्ट्ररक्षा का संकल्प

इस माह कई घटनाये घट ही गई या यूँ कहे की कुछ ऐसा किया की यह घटनी  ही थी. प्रणव दा का महामहिम बनना तय था बन गए. बधाई! शरद पवार जी ने अपना काम करवा ही लिया होना भी था कुछ कदम तुम बढ़ो कुछ हम बढे देश आगे बढे न बढे. अन्ना फिर शुरू कर गए अपनी मुहीम. होना क्या होगा खुद टीम को पता नहीं. आसाम में तुष्टिकरण के साये में मजबूत हो रहे घुस्पेटियो ने कहर बरपा,  देर से ही सही इलेक्ट्रोनिक मीडिया को दिखलाना पड़ा क्योंकि अन्ना टीम को नजरंदाज करना था नहीं तो वही मुख्य खबर बनती और अन्ना की  टीम हीरो बन जाती .  जनाब शाहिद ने मोदी जी गुफ्तगू की और गए काम से. दर्डा जी ने मोदी को शेर बताया संत बताया अब उन्हें बताना पड़ रहा ही की ऐसा कैसे उन्होंने कह दिया. और आखिर में शोले का डायलाग अपुन को याद आया अपनी जेल में सुरंग . पाक ने फिर अपनी नापाक हरकत  से भारत की और सुरंग खोद अंजाम दिया.  और कितनी सुरंग ही यह अभी गर्त में ही है ? फिर कोई धरतीपुत्र हल जोतेगा तब मालूम चलेगा .


राजनितिक परिदृश्य भारत का चिंतनीय है. क्षेत्रीय दलों का दबदबा राष्ट्रीयता के लिए चिंता है ऐसा अपुन को लगता है कई मसलो पर सौदेबाजी जैसा की इलेक्ट्रोनिक मीडिया अक्सर चिल्ला चिल्ला कर कहता है सुनने में आता ही है. अब वो किसी बिल को पास करवाना हो या फिर सदन में बहुमत दिखलाना हो या फिर राष्ट्रपति चुनाव हो . समझाइश हो ही जाती है . एक दुसरे को मना ही लिया जाता है.


अन्ना टीम का जलवा शुरू में हल्का था तो अन्ना के शुरू होते ही कुछ जोश आया . इतिहास  गवाह है की कोई आन्दोलन मुहीम लम्बे समय तक खीचना बहुत मुश्किल है.  और फिर अन्ना टीम ने तो सभी मुद्दों को अपना मुद्दा बनाने की आदत से बना ली है. इलेक्ट्रोनिक मीडिया को सुरसुरी की तलाश हर समय रहती है ऐसा सवाल दागते है की कुछ बोलो तो ब्रेकिंग न्यूज़ बनती है न बोलो तब भी बना देते है. अन्ना टीम को चाहिए की हर मुद्दे पर चलना शुरू न करे जिस मुद्दे  को लेकर मुहीम शुरू की है वही पर अपना ध्यान केन्द्रित रखे.


आसाम कश्मीर बनने जा रहा है गहरी चिंता का मुद्दा है. बंगलादेशी घुसपेठ का मुद्दा ले कर राष्ट्रवादी छात्र आन्दोलन शुरू हुआ सरकार भी बनाई. मगर सत्ता सुख ने गड़बड़ कर दी . राजनीति आ ही गई . राजनीति जब राष्ट्रीयता पर हावी होती है तब ध्येय से विचलित होना तय है. और राष्ट्रीयता के ध्येय से भटकने का अंजाम कष्टदायी होता है. आसाम में अभी जो कुछ हुआ वह तुष्टिकरण की पराकाष्टा का ही परिणाम है. खुद प्रधानमंत्री ने कहा है की यह देश के लिए "कलंक" है. मगर द्रढ़ता कहा है ? देश की सीमायें सुरक्षित नहीं लग रही ?  लोग जले मरे . नेताओ का दौरा हुआ और कीमत हो गई जानेवालो की ४-५ लाख रुपए की सहायता. और फिर सब भूल जायेंगे. फिर अपनी रफ़्तार खिसकेगा राष्ट्र अपुन का.
जनाब शाहिद ने नरेन्द्र मोदी से इंटरव्यू  क्या लिया उनपर आफत की बिजली घिर पड़ी. बोला तो मोदी ने की उन्हें फांसी दे दो सपा ने जनाब शाहिद को सजा दे दी . दर्डा जी ने नरेन्द्र मोदी को शेर और राष्ट्रीय संत जिस रेफरेंस में बताया उनके लिए मुश्किल खड़ी हो गयी . और यह मुश्किल मोदी जी ने उसी समय बतलादी . सोच का फरक है भाई . सोच से ही तो शुरू होती है लड़ाई .


पाकिस्तान के संग  क्रिकेट खेलने से दोस्ती मजबूत होती है ऐसा सोचना है हुक्मरानों का . फायदा राष्ट्र का हो न हो सट्टेबाजो का तो हो ही जायेगा. पाक ने सुरंग खोद दिखला दिया अपना चेहरा. वैसे ही वह तो लगा ही है अपुन के देश को खोखला करने में.
इस महीने के शुरुआती दिनों में देश भर में राष्ट्रवादी संघटनो ने कश्मीर के वार्ताकारो की रिपोर्ट को लेकर अपनी नाराजगी धरने प्रदर्शन तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर की थी. क्या दुसरे राजनितिक दलों की राष्ट्रीयता को लेकर जिम्मेदारी नाही बनती ?


इक बात दिल मेरे दिल की आपके दिल तक पहुचाने के लिए आपसे निवेदन. अगला महिना कल से शुरू होगा और इक पर्व "रक्षाबंधन" हर्षौल्लास के साथ मनाया जायेगा . आप सब से इक निवेदन कि आप इस पर्व को  "राष्ट्ररक्षा के संकल्प"  के साथ  मनाये. आये संकल्प ले हिंदुस्तान कि सीमाओ की सुरक्षा  की, संकल्प ले हिंदुस्तान की अखंडता की , संकल्प ले हमारे संस्कारो के सुरक्षा की, संकल्प ले जल, जमीन, जंगल, पर्यावरण के सुरक्षा की और साथ ही ले संकल्प स्वदेशी उत्पादों के सरंक्षण का.  संकल्प ले राष्ट्रविरोधी ताकतों को नेस्तनाबूद करने का.

1 comment:

  1. अपने काफी टाइम बाद कुछ लिखा है, लेकिन जिस तरह से आप लिखते हैं वो वाकई लाजवाब है... जो भी आपने लिखा वो हम सभी को पता है लेकिन जिस तरह से आपने लिखा वो पड़ने में और ज्यादा अछ्छा लगा, एसा लगा जेसे किसी हिंदी अखबार के किसी सम्पादकीय को पद रहा हु... राजस्थान पत्रिका ज्वाइन कर लो सर.... :-)

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