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Sunday, May 16, 2010

70, 00,000 Crores (1 crore is 10 million) Rupees In Swiss Bank .

इन दिनों इक मेल इधर उधर हो रही है  मुझे भी अपने अग्रज मित्रवर से प्राप्त हुई. बात इस मेल में स्विस बैंक की थी. जानते सब है मगर बोले कौन ? विश्व में ७० देशो में "काला धन " जमा करवाने की सुविधा है. स्विस बैंक के पास भारत का ७०,०००, ०० करोड़ रुपया है. इतना रुपया वहां चला गया . 

कमाई इतनी कौनसी और कैसी कि अपने देश में न रख स्विस बैंक में जमा की गई, कारण तो स्पष्ट है, मुझे समझाने  की आवश्यकता नहीं. 

मेरा भारत महान !!! जय हो !!! जय हो !!! 

विश्व के १८० देशो में भारत सबसे आगे है जिसका ७०,०००, ०० करोड़ रुपया स्विस बैंक में जमा है. ७० देश में इस तरह की सुविधा है आप अपने रूपये जमा करवा सकते है . अब आप ही अंदाजा लगाये कि  भारत से कमाया हुआ कितना रुपया और बाकि ६९ देशो में जमा होगा. 

स्विस बैंक कह चुकी है कि अगर भारत सरकार अधिकारिक रूप से लिख कर हमें पूछे तो हम यह जानकारी दे सकते है कि किन किन के रूपये यहाँ जमा है . मगर सरकार दुसरे कार्यों में इतनी व्यस्त है कि उसे पूछने का समय ही नहीं मिल पा रहा है . महंगाई की समस्या, नक्सली समस्या , उन दलों की समस्या जिनकी बैसाखी पर सरकार टिकी है ...... और न जाने कितनी समस्या से ग्रस्त हें हमारी सरकार जिसने १ वर्ष तो आखिर पूरा कर ही लिया है. 

स्विस बैंक में जमा रूपये के ब्याज से भारत सरकार के बजट की व्यवस्था हो सकती है , नरेगा बन्द कर ४५ करोड गरीब लोगो को १-१ लाख रूपये दे सकते है प्रति वर्ष. स्विस बैंक में जमा रुपयों से विदेशी ऋण का १३ गुना  चुकाया  सकता है. 

भारतीय श्रम से कमाई जो स्विस बैंक में जमा है उसकी चिंता सरकार करे तो कैसे ? हाँ याद आया इक मात्र सोलुशन है की इक आयोग का गठन कर लेते है मामला वैसे ही लम्बा हो जायेगा और तो और इक PIL भी लगवा देंगे . आयोग का कार्यकाल बढ़ा देंगे  कोई पूछेगा नहीं और पूछेगा तो कह देंगे मामला आयोग के पास है. 

सरकार की प्रतिक्रिया इस मामले में कुछ नहीं होना संदेहों को सच का सामना करने की चुनौती सी है. 

प्रतिक्रिया तो भारत सरकार को तुरंत करनी थी मगर स्विस बैंक को प्रत्युतर ही नहीं दिया . कर्म की चिंता नेताओ को नहीं जनता को है मगर यह दुर्भाग्य है कि हमारे देश कि जनता सुस्त है वर्तमान जीने कि व्यवस्था कुछ ऐसी है कि अपने और अपने के सिवाय किसी को कुछ नज़र ही नहीं आता है और जो कुछ जरा अपने से ऊपर उठ कर सोचता है तो "सिरफिरा" और "पागल", "निकम्मा " या फिर "और कुछ काम नहीं है इसके पास " कहला दिया जाता है . 

इक बात मेरे दिल की आपके दिल तक पहुचानी है कि क्यों उन सभी को कोई श्रेष्ट सम्मान से नवाजा जाना चाहिए जिनका रुपया वहां जमा है. भारत रत्न , पद्म भूषण विभूषण शायद कम लगे. 

Wednesday, May 12, 2010

दिल की बात

कैसे होगा आपको यकीन यह बतलाये
हम तो खुली किताब रहे है हमेशा

पन्ने अपने दिल के छुपाये तो क्यों
कोई गहरे से देखे तो मनाही  नहीं  है
पढ़े दिल से और रखे दिल में तो सुकून है
वरना पन्ने युही हवा में उड़ जायेंगे

कहा अटकेंगे पन्ने मेरे दिल के
खुद मुझे पता नहीं ........................