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Friday, December 9, 2011

मेरी तृप्ति को समर्पित

सही तो कहा हैं किसी ने  मेरे लिए
मुझे हर चीज बे मांगे  मिली है ,  तलब वालो से बेहतर रहा हूँ मैं

हर पल हर क्षण मेरी हर सांस है संग तुम्हारे
जिंदगी का सफर जिए जा रहा हूँ  संग  तुम्हारे

शब्दों में नहीं बांध सकता प्यार तुम्हारा
खुदा है मेहरबां कि जिंदगी में साथ है तुम्हारा

तुम्हारी मुस्कान ने मुझे मुस्कराना सिखा दिया
तुम्हारे साथ ने मुझे जिंदगी जीना सिखा दिया

वैसे तो संग संग है बचपन से हम, खुश हूँ मैं
मगर जिंदगी भर के साथ ने जीना खुशनुमा बना दिया

हकीकत है कि दीवानगी के सिवा कुछ नहीं है पास मेरे
यह क्या कम है कि दुनिया का अनमोल रत्न है पास मेरे  

Tuesday, August 23, 2011

 जिन्दगी तो हर इन्सान  जीता है इस जहाँ में
मेरा  जिन्दगी जीने का अंदाज कुछ और है
इतराता हूँ इठलाता हूँ अपने इस अंदाज पर
हाँ समझ लो की गुमान है मुझे
जाहिर है जीता  हूँ में आपकी दुआओ से स्नेह से
तो क्यों न इतराऊ में क्यों न इठलाऊ में
क्यों न करू गुमान में
कि भर दी है झोली मेरी इन दुआओ ने.
बस स्नेह यह बनाकर रखना हर समय हर पल
कि में भी रहू प्रफुल्लित और रख सकू आपको भी प्रफुल्लित

Thursday, July 14, 2011

मुंबई धमाका - फिर किया राहुल बाबा ने धमाका - अब चल रही है बयानों की फुलझड़िया

मुंबई धमाका - फिर किया राहुल बाबा ने धमाका - अब चल रही है बयानों की फुलझड़िया


१३ को मुंबई में धमाका हुआ , धमाके में निरीह जाने जानी थी गई, दर्द उसे ही होगा जिस के घर के माँ का बेटा, बहिन का भाई , पत्नी का पति समय से पहले इस दुनिया से आतंकवाद के भेंट चढ़ गया. .
सरकारी इमदाद देने घडियाली आंसू बहाने और आरोप प्रत्यारोप का दौर तीन चार दिन चलेगा और फिर खबर ख़तम. नई ब्रेकिंग  न्यूज़ आते ही मीडिया इसे भी भूल जाएगी जैसे की भ्रस्टाचार  की न्यूज़ दो तीन दिन से नज़र नहीं आ रही है .   
राहुल बाबा भी मजेदार है उन्होंने बयान क्या दिया बवाल मच गया .राहुल बाबा ने मुंबई धमाको के बाद इक बयान दिया की आतंकवादी हमले रोके नहीं जा सकते.  अब मुंबई की लोकल ट्रेन में सफ़र करने से पहले सोचना पड़ेगा की मीडिया में स्टोरी बनाने के लिए लोकल ट्रेन में जाये या नहीं या फिर मुम्बईकरो ने जम कर विरोध किया तो उलटी स्टोरी बन जाएगी. आज टीवी में राहुल बाबा की पोस्टर जलने के दृश्य देख कर तो यही लग रहा था. दो दिन पहले उनकी सुरक्षा की भेंट इक सुरक्षा कर्मी चढ़ ही गया था. अस्पताल के बाहर इस घायल सुरक्षाकर्मी  को राहुल बाबा की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों ने काफी देर तक राहुल बाबा की सुरक्षा के रक्षा के चलते अन्दर नहीं आने दिया था. और वो चल बसा  हाँ यह समाचार तो नहीं आया की राहुल बाबा उसके भी घर सांत्वना देने गए थे. आती भी कैसे ?

राहुल बाबा ने मुंबई धमाको के बाद इक बयान दिया की आतंकवादी हमले रोके नहीं जा सकते. जैसे ही बवाल मचा मीडिया पर खबरे  आने लगी राहुल बाबा घिरने लगे तो कांग्रेस के उनके  सिपहसलार भी राग राहुल अलापने लगे. अभिषेक मनु सिंघवी की तो तारीफ करे जितनी कम उन्होंने तो कह दिया आतंकवादी तो इक बार शहीद  होता है ..... अब उनसे जरा पूछिए की आतंकवादी शहीद कैसे होता है ?  दिग्गी बाबा राहुल के बयान के साथ कैसे न होंगे वे फरमाते है पाकिस्तान में तो अक्सर  होते है हमारे यहाँ वैसे हालत तो नहीं है ना ? दिग्गी महाराज आप की मंशा आखिर है क्या आप भारत को पाकिस्तान बना कर ही दम लेंगे क्या. 

देश  के गृह मंत्री  चिदंबरम जी आपको बारम्बार प्रणाम.  आपने भी गजब ढा दिया.  सरकार की नाकामी से पल्ला झाड़ ही दिया .

देश का दुर्भाग्य की गृह मंत्री , अन्य मंत्री, कांग्रस के संत्री सभी इक ही राग अलाप रहे की इतने बड़े  देश में यह छोटी  सी घटना घट गयी तो कोई कहर नहीं आ गया.  देश के नागरिको की सुरक्षा की जिमेदारी से देश के प्रधानमंत्री गृह मंत्री अन्य लोग बच नहीं सकते यह कह कर. आत्मविश्वाश टूट जायेगा इस देश के नागरिको का ओर आक्रोश में बदल गया तो न जाने क्या होगा.

Sunday, June 5, 2011

क्यों आई यह रात रामलीला मैदान में ?

सवेरे रेलवे स्टेशन  पर पांच रूपये में तीन समाचार पत्र एक हाकर ने  लेने का दबाव पूर्ण आग्रह किया उसके आग्रह को टाल नहीं सका क्योंकि सवेरे सवेरे समाचार पढने की भूख को तृप्त तो करना ही था.  
स्तब्ध था में रुक सा गया इक बार . आश्चर्य भी हुआ अटपटा भी लगा . लगा की सही कहते है हम सब कि "इस देश का मालिक तो भगवन राम ही है, ऐसा ही चलेगा इस देश में ".
तो फिर क्यों उस रात राम गायब हुए रामलीला मैदान से. क्यों परिवर्तित  हो गया वो "रावण लीला " मैदान में. ऐसा क्या हुआ कि देश के ठेकेदारों को मध्य रात्रि में निरीह अहिंसक सत्याग्रहियों कि ऐसी कि तैसी करने रक्षको को भक्षक बना भेजा . ऐसा तांडव करने कि आखिर कोई वजह तो होनी चाहिए न . तानाशाह प्रवर्ती कि इस हरकत से दिल मानो दहल गया. माँ भारती के इस देश में माताओ बहिनों और अन्यो के साथ बर्बरता पूर्ण व्यवहार उचित तो नहीं ठराया जा सकता है. 

बाबा कि इक चिट्ठी से गड़बड़ हुआ आन्दोलन , बाबा का बेक फुट पर आना उससे ही सरकार अपना गेम प्लान पूरा कर सकती थी . मगर किन कारणों से सरकार में बैठे मंत्रियों ने  सरकार को ही बेक फुट पर ला खड़ा किया . सरकार कि इस बर्बरपुर्वक कार्यवाही से तो स्वंय ही कठघरे में आ खड़ी हुई है ?  

देश के गृह मंत्री जी आपकी नाक के निचे ही ऐसा हो रहा है कहाँ है आप ? क्या कारण रहे क्या बतला पाएंगे आप. 
 जिस जन सामान्य की चिंता कुछ लोगो को सता रही है  उसकी खुद की नैतिक जिमेदारी क्या है ? उसको खुद इस आन्दोलन का सक्रीय हिस्सा नहीं होना चाहिए क्या ? राष्ट्रवादी संघटन अपना कर्तव्य निभा रहे है मगर हिंदुस्तान का जन सामान्य दूर खड़ा रह कर देखता है। जन सामान्य को राष्ट्रवादी संघटनो के आन्दोलन में सक्रीय सहभागी बनना होगा । कल अन्ना हजारे ने प्रेस कांफ्रेंस में सही तो कहा था भारत के काले अंग्रेजो ने मध्यरात्रि में अहिंसक सत्याग्रहियों पर दमन किया ।
कितने लोगो ने कल के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया ? किस जन सामान्य की बात कर रहे है जिसे किसी से कोई सरोकार नहीं ? वह जन सामान्य जो सिर्फ अपने स्वंय तक ही केन्द्रित है ।
कांग्रेस जन सामान्य के इस भाव को अच्छी तरह जानती है इसलिए जन सामान्य को अपने हिसाब (जैसा रामलीला मैदान में किया)  से हांक रही है और हांकती रहेगी । 

देश के मुद्दों को कोई अगर उठाता है तो उससे किसी को कोई परेशानी क्यों और उस मुद्दे पर अगर कोई संघटन समर्थन दे तो गलत क्या है ? बाबा के इस मुद्दे पर कुछ राजनितिक पार्टियों ने समर्थन दिया तो उसका इस्तकबाल करना चाहिए कुछ राष्ट्रवादी संघटनो ने समर्थन किया तो साम्प्रदायिक ताकतों के द्वारा समर्थित बताना तो लाजिमी नहीं है न . 

सोच बदलना होगा सोच . पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सिर्फ राजनितिक नफा नुकसान तक ही सिमित रह कर केंद्र सरकार को कार्य नहीं करना है . वरन देश में देश की जनता द्वारा  राष्ट्र हित में सुझाये गए मुद्दों पर भी पूर्ण सकारात्मक द्रष्टिकोण रखना होगा इस देश के हुक्मरानों को. 

अपुन के देश की कुंडली अभी ठीक नहीं लगती . राहू, केतु अथवा शनि किस मंत्रालय में बैठ कर किस किस को नीच द्रष्टि से देख रहे है  , कब बुरा समय ला दे कुछ कह नहीं सकते . कब आग लग जाये घर के चिराग से मालूम नहीं. 

तीस्ता जी आप कहा है अभी , राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किधर खो गया है इस देश का ?  क्यों वो भयावह रात आई इस देश में जो सब कुछ उठा ले गई ...... और छोड़ गई कई अनुतरित प्रश्न .....?

Friday, March 11, 2011

प्रणीत - जन्म दिवस पर हार्दिक बधाई


बेटा मेरा आज इक वर्ष और बड़ा हो गया

कल कि बात लग रही बहुत छोटा था


समय निकला कि बड़ा हो गया


वक्त मस्ती से निकला रोते हँसते खेलते
खेलते खेलते जूता उसका मेरे पाँव से बड़ा हो गया
वो आज २० का हो गया

बीस बसंत हँसते खेलते निकले
ऐसे हजारो बसंत और निकले
दिल की बस यही इच्छा

इश्वर से बस यही गुजारिश
हम करे पूरी इसकी हर ख्वाहिश

बस इक गुजारिश बेटे से भी
बनो इतने काबिल की
देश के लिए भी कुछ कर सको