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Friday, December 9, 2011

मेरी तृप्ति को समर्पित

सही तो कहा हैं किसी ने  मेरे लिए
मुझे हर चीज बे मांगे  मिली है ,  तलब वालो से बेहतर रहा हूँ मैं

हर पल हर क्षण मेरी हर सांस है संग तुम्हारे
जिंदगी का सफर जिए जा रहा हूँ  संग  तुम्हारे

शब्दों में नहीं बांध सकता प्यार तुम्हारा
खुदा है मेहरबां कि जिंदगी में साथ है तुम्हारा

तुम्हारी मुस्कान ने मुझे मुस्कराना सिखा दिया
तुम्हारे साथ ने मुझे जिंदगी जीना सिखा दिया

वैसे तो संग संग है बचपन से हम, खुश हूँ मैं
मगर जिंदगी भर के साथ ने जीना खुशनुमा बना दिया

हकीकत है कि दीवानगी के सिवा कुछ नहीं है पास मेरे
यह क्या कम है कि दुनिया का अनमोल रत्न है पास मेरे  

5 comments:

  1. sir..... aaj ye sayarana andar kesa....
    vaise maja aa gaya bahut accha likha

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  2. They say, Love cannot be described in words. BUT you have done it with absolute perfection :)

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