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Tuesday, December 10, 2013

इक लम्हा जो मेरी जिन्दगी में आया

मेरी तृप्ति के लिए हमारे परिणय दिवस के शुभअवसर  पर .......

इक लम्हा जो मेरी जिन्दगी में आया
 
बचपन से हम संग संग थे 
किसने सोचा था हमसफ़र होंगे जिंदगी के 

कुछ पल गुजरे अकेले जीवन के 
उन लम्हों में भी तुम ही तो थी खयालो में

 मेरे लिए ही तो उसने बनाया  तुम्हे
इक लम्हा जो मेरी जिन्दगी में आया

लम्हा वो स्वर्णिम था मेरी जिंदगी का 
कि हमसफ़र बनी तुम मेरी जिंदगी की 

 खुशियों  से पल  पल  लम्हे बीत रहे संग संग
हर नई  सुबह 
 और लम्हे जुड़ रहे जीवन में रहने को संग संग 

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