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Monday, May 12, 2014

विश्लेषण अबकी बार …राजस्थान से कौन होगा दिल्ली मे भागीदार



विश्लेषण अबकी बार राजस्थान से कौन होगा दिल्ली मे भागीदार
प्रफुल्ल मेहता
लोकसभा चुनावो मे अगर नमो इफ़ेक्ट  रहता है तो दृश्य इस प्रकार होगा :


























 
कौन अब की बार यह सवाल दिमाग में रहेगा बार बार जब तक नहीं खुलेगी ईवीएम ।  यानि की १६ मई को ११-१२ बजे तक दिल्ली के सिहांसन पर ताज पोशी किसकी होगी तस्वीर साफ हो ही जाएगी। 
देश का वातावरण तो भाजपा के पक्ष मे दिखाई दे रहा  है।  जैसे जैसे मौसम में गर्मी बढ़ रही है राजनैतिक वातावरण का  पारा  भी  बढ़ता जा रहा है।  गर्मी के तीखे तेवर के बावजूद मतदान प्रतिशत बढ़ना  परिवर्तन की  बयार ही माना  जा सकता  है .
इस चुनाव की  खासियत तो यह है कि एक तरफ़ अकेले मोदी है पार्टी से भी कहीँ उपर और दूसरी  तरफ़ सभी पार्टीयां।  नित नये आरोप प्रत्यारोप मे मोदी और उनकी  चुनाव प्रबन्धन टीम का ही कमाल  लग रह है कि मोदी  पर किये जा रहे हर वार उलटे पड़ रहे है।
अमेठी में बाबा का पहली बार मतदान के दिन कई मतदान केंद्रो को नापना मोदी इफ़ेक्ट का ही नतीजा हैं वरना पहले  कभी ऐसा हुआ नहीं।    
राजस्थान में इस ताजपोशी की भागीदारी कितनी किसके पक्ष में रहेगी यह तो १६ मई को ही स्पष्ट होगी फिर भी आंकलन करने की पुरानी आदत के मुताबिक मैं भी अपने आप को रोक नहीं पा रहा। 
२००४ के लोकसभा चुनावो के बाद परिसीमन हुआ।  परिसीमन के बाद २००९ के  लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने २५ में से २०  सीटें हासिल कर अपना परचम फहराया था। राजस्थान में भाजपा को जो उम्मीद थी वह उसके मुताबिक नहीं रही।  मात्र ४ सीटो पर उसे मन मसोस कर रहना पड़ा।  एक सीट निर्दलीय किरोड़ी लाल मीणा ने जीती।
पुरे देश में जिस तरह से वातावरण दिखाई दे रहा है उसके मुताबिक अगर ईवीएम के डाटा बाहर आयेंगे तो भाजपा के लिए दिल्ली दूर नहीं लगती।
राजस्थान में इन चुनावो में मतदाताओ का उत्साह नजर आया और पिछले लोकसभा चुनावो से १४.५६ प्रतिशत मतदान अधिक हुआ है।  २००९ के चुनावो में कांग्रेस ने १०. ६२ प्रतिशत मत भाजपा से अधिक हासिल कर २५ में से २० लोकसभा क्षेत्रों  पर विजय हासिल की थी। इस बार के चुनावों  में अगर बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत पूरा भाजपा के पक्ष में मानें  तो पूरी की पूरी २५ लोकसभा क्षेत्रों  पर विजय स्पष्ट नजर आती है , मगर   कुछ लोकसभा क्षेत्रों  के समीकरणों के चलते हो सकता है की भाजपा को २१ -२३ सीटों  पर संतुष्टि करनी पड़े।
 पिछले लोकसभा चुनावों से इस बार १४.५६ प्रतिशत मतदान अधिक हुआ है. अगर मोदी इफ़ेक्ट को माना जाये और पूरा बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत भाजपा के पक्ष में जोड़े तो पूरी २५ की २५ सीटें भाजपा को मिलती दिखाई देती है।  
अगर १० प्रतिशत मतदान भाजपा के पक्ष  में  माने तो १९-२१  सीटें मिलती है और अगर १२ प्रतिशत भाजपा की लहर में जोड़े तो २१-२३ सीटें मिलती दिखाई देती है.
दौसा, बाड़मेर  सीटों  पर समीकरण थोड़े उलझे हुए लगते है।  बाड़मेर में जहा मतदान प्रतिशत बहुत अधिक रहा है वही दौसा में पिछले चुनावो से २.९८ प्रतिशत मतदान कम हुआ है . दौसा में  किरोड़ी लाल मीणा , नमोनारायण मीणा तथा हरीश मीणा में त्रिकोणीय संघर्ष दिखाई दे रहा है। नागौर तथा सीकर भी चर्चा मे है।  
बाड़मेर में भाजपा ने दम  तो पूरा ठोका हैं  मगर जसवंत सिंह को कमजोर भी नहीं माना जा सकता हैं , मुस्लिम मतों पर उनकी  अच्छी  पकड़ मानी  जा रही हैकांग्रेस के युवा प्रत्याशी हरीश चौधरी क्षैत्र  में जनता के चहेते तो रहे है मगर ठीक चुनावो से पहले कांग्रेस से  भाजपा में शामिल हुए कर्नल  सोनाराम चौधरी अगर जाट वोटों  में पूरी तरह सेंध लगाते है तो जसवंत सिंह के लिए दिल्ली दूर हो जायेगी।
कांग्रेस का संगठन मे परिवर्तन राजस्थन को रास नहीं आया लगता , संगठन का  जिम्मा अशोक गहलोत को मिलता तो उनकी भुमिका  अहम रह सकती थी , फिर भी  उन्होने अपना  दम  पूरा  ठोखा हैं  .
जोधपुर सीट की बात करें  तो गजेन्द्र सिंह शेखावत तक़रीबन १ लाख ४४ हज़ार से २ लाख से अधिक मतों से जीत सकते हैं।
 
पाली, जालौर , बीकानेर, श्रीगंगानगर, नागौर तथा बाड़मेर मे भी भाजपा  विजय का परचम  फहराती  नजर आती है।

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