Thursday, May 9, 2013

कर नाटक - कर्नाटक का जलवा

कर नाटक - कर्नाटक  का जलवा
भ्रस्टाचार  की खबर अब रोजमर्रा की आवश्यकता हो गई लगती है. भ्रस्टाचार भी तो  तब होता है जब सत्ता सुख मिलता है। केंद्र में यू पी ए  सत्ता सुख भोग रही है तो कर्नाटक में भाजपा ने पहले सुख भोगा  और अब वनवास की और चल पडे . कांग्रेस जनता को सर आँखों पर बिठा रही है कि  उसने हम पर विश्वास किया। यह सर्टिफिकेट भी हासिल किया जा रहा है की हमारी नीतियों का जनता सपोर्ट करती है .
इस नाटक की सफलता में भी लोचा दिन भर जो आनन्द चेनलों  में आना चाहिए था वो नहीं आ सका। क्योंकि एक नये नाटक का धमाका भी दोपहर में ही हो गया . कोयले की कालिख वाला - सी  बी आई को तोता बताया तो चेनलो से कांग्रेस की जीत का तोता फुर्र  हो गया। यह चेनलो का नाटक था .
 कई समीकरण बनाये जा रहे है कुछ राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावो को देखते हुए। राहुल बाबा पास हो गए और मोदी जी फ़ैल हो गये.
अपुन के छोटे से दिमाग में तो इतना समज में आया की यह नाटक ऐसे ही चलता रहेगा . किरदार नए आते रहेंगे। प्रोड्यूसर, डायरेक्टर तो सिर्फ वे ही रहेंगे। चुनावी नाटक का सफल मंचन हो गया तो  प्रोड्यूसर, डायरेक्टर की तारीफ के कसीदे पढ़े जायेंगे नहीं तो फिर आप सोच ही सकते है जैसा की उत्तर प्रदेश तथा बिहार के चुनावो में जो हुआ .
अपुन को लगता है की कर्नाटक  में कांग्रेस की सरकार बनाने में जितना सहयोग जनता ने दिया उससे ज्यादा श्रेय भाजपा को देना चाहिए . अगर भाजपा का कर्नाटक में नाटक नहीं होता तो भला कांग्रेस को ताजपोशी कैसे नसीब होती . फिर जनता तो जनता है चार चार नाटक कंपनिया (कांग्रेस, भाजपा, जेडीएस ,केजीपी) में से किसी एक नाटक कंपनी को चुनना भी तो भला मुश्किल काम. जनता उतनी ही मगर चार चार नाटक कंपनियों में दर्शको के बंटवारे से हित तो एक ही कंपनी को होना था तो वो हो ही गया । कुछ काम तो विलेन बिगाड़  ही सकते है सो विलेन ने अपना काम कर ही लिया। और भाजपा कंपनी को चारो खाने चित कर ही दिया .
अपुन राजस्थान से इधर का चुनाव इस वर्ष के अंत तक होने वाले है. अभी "यात्रा" नाटक चरम  पर है. कांग्रेस सन्देश यात्रा और भाजपा सुराज यात्रा पर ,  दोनों ही पक्ष अपनी अपनी राग अलाप रहे है. फिर एक नई  नाटक कंपनी  राजपा भी यात्रा पर है देहली कूच  भी करने वाले है शीघ्र। भाजपा कंपनी में कही एक जुटता नजर नहीं आ रही है। इस कंपनी  के पुराने दिग्गजो ने  अभी अगड़ाई नहीं ली है लेकिन इस बार भी अगर अन्दर रहते हुए ही  विलेन का रोल किया तो कर्नाटक  वाला नाटक यहाँ पर भी संभव लगता है.खतरा तो कांग्रेस कंपनी को भी है अपने अन्दर के विलेनो से . देखना है राजस्थान की जनता क्या नाटक करती  है ओर किस कंपनी का भ्रस्टाचार की थीम पर चलने वाले नाटक को पसंद करती है.
नवभारत टाइम्स ब्लॉग पर भी :
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/ikbaatmeredilki/entry/%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A8-%E0%A4%9F%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A8-%E0%A4%9F%E0%A4%95-%E0%A4%95-%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%B51