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Wednesday, May 12, 2010

दिल की बात

कैसे होगा आपको यकीन यह बतलाये
हम तो खुली किताब रहे है हमेशा

पन्ने अपने दिल के छुपाये तो क्यों
कोई गहरे से देखे तो मनाही  नहीं  है
पढ़े दिल से और रखे दिल में तो सुकून है
वरना पन्ने युही हवा में उड़ जायेंगे

कहा अटकेंगे पन्ने मेरे दिल के
खुद मुझे पता नहीं ........................

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