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Tuesday, June 30, 2009

अब किसको क्या कहे ?

चीनी भी अब कसैलि होने लगी है. प्रभु के गुन भि अब बिना दाल खाये गाऐ जा रहे है . प्रभु ही तो इक सहारा बचा है. सरकार तो बस कार मै ही घुम रहि है. किराने कि दुकान से किनारा करने लगे है लोग . स्वाइन फ्लु क्यो नही फैलेगा - तरकारी सपना जो है . मानसून की मेहरबानी हे नही. किसको दोष दे. हमे अपने ही कामो से फुर्सत नही हे देश की बाद मे सोचेन्गे . 


सरकार को दोष दे हम बचे मगर मूल मे रोग क्या हे ? कौन सोचे ? नि:सन्देह सरकार मुख्य्त: जिमेदार हे मगर हमारी भी जवाबदारी बनती हे.