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Sunday, May 3, 2009

ऐसा क्यों नही हो सकता देश हित में

अभी तो बस चुनाव के कारन पत्र पत्रिकाओ अथवा टीवी चेनलोंमें बस गरमा गर्म मसाला ही पढने और देखने सुनने को मिलता है। बस बैठ बैठे में इक विचार आया कि राष्ट्र हित में मुख्य दल कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी को कोई कड़ा निर्णय लेना ही होगा । यह निर्णय दिल को मज़बूत रख कर दिमाग से लेना होगा क्योंकि दिल कमजोर और दिमाग मज़बूत होता है ।
देश में जिस कदर क्षेत्रीय दलों कि भरमार बढ़ रही है , वह चिंताजनक है, पिछले कुछ वर्षो से हम मिलीजुली सरकारों में मुख्य दलों कि मजबूरी और छोटे दलों का उनसे मोल भावः कर अपने हितों (देश हित नही ....) के लिए सौदेबाजी का नज़ारा देख चुके है। राष्ट्र को इसका नुकसान बड़ी कीमत देकर चुकाना पड़ रहा है। राष्ट्र कि उन्नति के लिए अब लगने लगा है कि दो दलों का होना ही उत्तम होगा। बहस का विषय हो सकता है मेरा यह सोचना , मगर मेरा दिल है कि दिमाग से उपजी बात आपके सामने रख रहा है।
पूर्वी राज्यों में क्या हो रहा है बहुतो को नही मालूम । अभी हाल ही में मेघालय में बीजेपी ने कांग्रेस कि सरकार को समर्थन दिया था , इसमे बुराई भी क्या है ? मुझे तो नही लगता ....
इस बार देश में हो रहे बिन मुद्दे के लोकतंत्र के इस महापर्व के नतीजे किसी भी इक दल को स्पष्ट बहुमत दिलवा पाएंगे मुश्किल जान पड़ता है । उस दशा में दोनों मुख्य दलों से इक निवेदन कि बजाय सौदे बाज़ी के दोनों मुख्य दल बैठ कर दिमाग से निर्णय ले देश हित में और इक नई मिशाल कायम करे । राष्ट्र हित का न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय कर हिन्दुस्थान को इक नई ऊंचाई देंगे ऐसा मेरा दिल से निवेदन है।
आपको भी ऐसा लगता होगा मेरे दिल का ऐसा मानना है ...........मेरे दिल के किसी एक कोने से आवाज आ रही है कि ऐसा ही होगा इस बार ....................

2 comments:

  1. sahi vichaar hai... ati har jagah buri hai...

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  2. अगर आप निश्‍चय कर लें, तो कुछ भी असम्‍भव नहीं है।

    SBAI TSALIIM

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