Friday, December 9, 2011

मेरी तृप्ति को समर्पित

सही तो कहा हैं किसी ने  मेरे लिए
मुझे हर चीज बे मांगे  मिली है ,  तलब वालो से बेहतर रहा हूँ मैं

हर पल हर क्षण मेरी हर सांस है संग तुम्हारे
जिंदगी का सफर जिए जा रहा हूँ  संग  तुम्हारे

शब्दों में नहीं बांध सकता प्यार तुम्हारा
खुदा है मेहरबां कि जिंदगी में साथ है तुम्हारा

तुम्हारी मुस्कान ने मुझे मुस्कराना सिखा दिया
तुम्हारे साथ ने मुझे जिंदगी जीना सिखा दिया

वैसे तो संग संग है बचपन से हम, खुश हूँ मैं
मगर जिंदगी भर के साथ ने जीना खुशनुमा बना दिया

हकीकत है कि दीवानगी के सिवा कुछ नहीं है पास मेरे
यह क्या कम है कि दुनिया का अनमोल रत्न है पास मेरे  

Tuesday, August 23, 2011

 जिन्दगी तो हर इन्सान  जीता है इस जहाँ में
मेरा  जिन्दगी जीने का अंदाज कुछ और है
इतराता हूँ इठलाता हूँ अपने इस अंदाज पर
हाँ समझ लो की गुमान है मुझे
जाहिर है जीता  हूँ में आपकी दुआओ से स्नेह से
तो क्यों न इतराऊ में क्यों न इठलाऊ में
क्यों न करू गुमान में
कि भर दी है झोली मेरी इन दुआओ ने.
बस स्नेह यह बनाकर रखना हर समय हर पल
कि में भी रहू प्रफुल्लित और रख सकू आपको भी प्रफुल्लित

Friday, March 11, 2011

प्रणीत - जन्म दिवस पर हार्दिक बधाई


बेटा मेरा आज इक वर्ष और बड़ा हो गया

कल कि बात लग रही बहुत छोटा था


समय निकला कि बड़ा हो गया


वक्त मस्ती से निकला रोते हँसते खेलते
खेलते खेलते जूता उसका मेरे पाँव से बड़ा हो गया
वो आज २० का हो गया

बीस बसंत हँसते खेलते निकले
ऐसे हजारो बसंत और निकले
दिल की बस यही इच्छा

इश्वर से बस यही गुजारिश
हम करे पूरी इसकी हर ख्वाहिश

बस इक गुजारिश बेटे से भी
बनो इतने काबिल की
देश के लिए भी कुछ कर सको

Sunday, December 12, 2010

विकिलीक्स बॉलीवुड अंदाज में

खिसियाई बिल्ली खम्भा  नौचें. विकिलीक्स ने क्या लीक किया की सब गड़बड़झाला हो गया . विकिलीक्स के जूलियन असांजे  का जूनून भी काबिले तारीफ है . अपुन का तो कुछ है नहीं इसलिए चिंता नहीं . जिसका लीक हुआ उसकी बैंड बज गई. 
अमेरिका की चोधराहट समझ आ गई है सबको. अब भी नहीं आई तो सीख लो भाई फिर मत कहना की ध्यान नहीं रहा.
दबंग अमेरिका की दबंगता अब जाती दिख रही है . अमेरिका बदनाम हुआ भाई . (मुन्नी तो पहले ही थी) . अपुन को लगता है की ब्रेक के बाद अब अमेरिका का क्या होगा. आर्थिक रूप से खोखला सामाजिक रूप से कमजोर. शस्त्रों का व्यापर तो करने ही पड़ेंगे आतंकियों को तैयार. वो अलग बात है की तैयार किये से खुद ही घिर गया है और चोट खा चुका है. बुजुर्गो ने कहा भी तो है की बोया पेड़ बबूल का तो आम कहा से होय .
पहले तो अंगूर खट्टे होते थे अब तो आम भी खट्टे लग रहे है. मीठे का जमाना  गया .
अमेरिका बड़ा तीस  मारखां बनता था. अमेरिका के लिए रावण (असान्जे) ने बैंड बाजा बारात निकाल दी भाई . क्या लम्हे अब आये है इस बदमाश कम्पनी के. हिलेरी तभी तो कह रही है आई हेट लव(true) स्टोरी . 
विकिलीक्स ने ऐसी काइट्स उड़ाई की अब अंजाना अंजानी कहते भी नहीं बन रहा अमेरिका से. समझ नहीं आ रहा है की लफंगे परिंदे है कौन ? पहले ही चेताया था अमेरिका ने भारत को,  कि कुछ गड़बड़ विकिलीक्स करने वाला है इसलिए चिंता न करे वी आर फेमेली. 
असान्जे कह रहे है कि खेले है हम जी जान से  अमेरिका काहे को गुजारिश करता है कि इसे न दिखाऊ मेरी मर्जी में चाहे यह करू में चाहे वो करू . 

अल्लाह के बन्दे तेरे से गुजारिश कि दोगलापन छोड़ कुछ नेक काम कर. न जाने क्यूँ  अमेरिका ऐसा करता है . अमेरिका तो सोचता है कि  में ऐसा करूँगा तो किसी को नो प्रोब्लम है. लगता है अमेरिका यमला पगला दीवाना हो चुका है. अमेरिका ने बहुत कुछ गोलमाल किया है अब एक्शन रिप्ले मत करना भाई .
अमेरिका के नक्षत्र अब गड़बड़ है भाई . अमेरिका का रक्त्चरित्र  अब समझ आ रहा है सबको. कैसे काहे कि झुटा ही सही . 
विकिलीक्स ने कई देशो में आक्रोश पैदा कर दिया है .  विकिलीक्स कि रामायण ने गजब ढाया है. लिक्स की खिचड़ी से किसका इमोशनल अत्याचार हो रहा है भाई . विकिलीक्स ने ऐसी उड़ान भरी है की अमेरिका को खट्टा मीठा लगने लगा है.  और तो और इंटरपोल  से असान्जे को रेड अलर्ट  जारी किया है. असान्जे तो क्रांतिवीर हो गया है . गोपनीय दस्तावेजो से तो अब राजनीति  के राज खुलने लगे हैं.  विकिलीक्स की पाठशाला भी गजब की है जाने कहा से आई है यह हकीकत. अमेरिका इंटरपोल के जरिये विकिलीक्स के असान्जे को कह रहा की तुम मिलो तो सही सब ठीक कर दूंगा. देखते है की कौन इस रण में जीतेगा. 

Wednesday, December 1, 2010

मुस्कराने लगा में भी

जीने का  मसला मालूम नहीं 

जीने की चाह फिर भी है

क्या कर लिया
क्या कर लेंगे , कुछ पता नहीं 
फिर भी हर शाम सुबह का इंतजार रहता है  

दर्द लिए रात करवटे बदलता रहा
सुबह कम होगा शायद इस चाह में 

सुबह सलवटे थी चद्दर पर
दिल में दर्द गहराया था 
फिर भी जीने की चाह ने 
सुबह का सूरज दिखा दिया 

देखे कई चेहरे मुस्कराते 
अपना दर्द कफ़न किया 
मुस्कराने लगा में भी 
यह समझ कि सबने अपना दर्द कफ़न किया 

Monday, June 21, 2010

.... इंतजार उनका



सूर्य की किरणे मद्धम क्यों है  ?
हमने तो बस अपने दिल में उनका चेहरा देखा है ......

चन्द्रमा की चांदनी शिथिल क्यों है ?
हमने तो बस दिल से उनको नजदीक आने का कहा है .....

हवा में ठहराव सा क्यों है ?
लगता है दिल की मुराद वो पूरी करने वाले है .......

कोई आवाज़ अब सुनाई क्यों  नहीं देती ?
लगता है उनके कदम अब मेरी और आने लगे  है .......

Wednesday, May 12, 2010

दिल की बात

कैसे होगा आपको यकीन यह बतलाये
हम तो खुली किताब रहे है हमेशा

पन्ने अपने दिल के छुपाये तो क्यों
कोई गहरे से देखे तो मनाही  नहीं  है
पढ़े दिल से और रखे दिल में तो सुकून है
वरना पन्ने युही हवा में उड़ जायेंगे

कहा अटकेंगे पन्ने मेरे दिल के
खुद मुझे पता नहीं ........................