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Monday, January 21, 2013

चिंतन शिविर से गृहमंत्री का चिंतन बाहर आया

चिंतन शिविर से गृहमंत्री का चिंतन बाहर आया -- प्रफुल्ल मेहता 

कांग्रेस के चिंतन शिविर में देश के गृह मंत्री का चिंतन बाहर  आया 
भारत के गृहमंत्री का चिंतन बाहर आ ही गया . हिन्दू आतंकवाद की चिंता कर रहे थे जयपुर में। सही भी है तुष्टिकरण की बुनियाद पर टिकी पार्टी के होने के कारण पार्टी अध्यक्षा  एवं नए उपाध्यक्ष के सामने अपनी इमेज कौन नहीं बनाना चाहेगा। चिंतन शिविर के मंथन से अमृत निकलने की गुंजाईश तो थी ही कहा इसलिए विष ही निकला। इधर हिन्दुओ का महाकुम्भ चल रहा है और देश के गृहमंत्री को हिन्दू आतंक  वादी नजर आने लगा है। और तो और वह भी राष्ट्रवादी विचारो के संघठन यथा भाजपा तथा संघ ,में तैयार हो रहे है ..शिंदे ने खुफिया सूचनाओं के आधार पर ये खुलासा किया है। ( http://khabar.ibnlive.in.com/news/90043/12/4)
 
शिंदे ने आरएसएस और बीजेपी पर हिन्दू आतंकवाद को बढ़ावा देने और ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगाया है। शिंदे ने बीजेपी पर समाज में जहर घोलने का भी आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने गृहमंत्री के बयान से सहमति जताई है।कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी का कहना है कि अगर शिंदे ऐसा बयान दिया है तो उनके जरूर कोई सबूत होगा। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने सुशील कुमार शिंदे के बयान को सही ठहराया है।
दिग्विजय जी, ज़नाब राशीद  अल्वी और भी  होंगे जो हाँ में हाँ इक सुर में मिलायेंगे। और इस सुर को फिर टीआरपी के चक्कर में इलेक्ट्रोनिक मीडिया तान दे ही देगा।
 
देश की सुरक्षा का ख्याल गृहमंत्री जी को ही तो रखना है यह उनकी जिम्मेदारी है , और जिम्मेदारी ठीक से निभा ले इसलिए सरकार ने उनको कई सुविधाए भी दी है। देश के गृह मंत्री बोलते  हे मतलब हकीकत तथ्यात्मक इनसे दूर हो ही  नहि सकते। उन्होंने फ़रमाया वो शत प्रतिशत सही होगा। ऐसा  खुद उनकी पार्टी के ही रशीद अल्वी जी भी फरमा  रहे थे। 
 
 
शिंदे से दुरी रखने वाले कोंग्रेस  के कुछ नेता यह समझा रहे होंगे की आखिर क्या जरुरत आन पड़ी की ऐसा वक्तव्य उस समय दिया जब सभी अपने चेनलो पर राहुल राहुल चल रहा था। बीच में ही गड़बड़ हो गई . शिंदे ऊपर राहुल बाबा दुसरे नम्बर पर। 
 
खैर बात सिर्फ इतनी है की गृह मंत्री जी किसी जनसभा में नहीं अपनी पार्टी के मंच से पार्टी के अधिवेशन में बोल रहे थे। देश की जनता भी उनसे सवाल पूछेगी ?  कही तथ्यात्मक सबूत  है तो फिर हिन्दू आतंकवाद को बढ़ावा देने में लिप्त है क्या गृह मंत्री जी जिन्होंने सबूत   होते हुए ( अल्वी जी ने तथा दिग्विजय जी ने भी सुर में सुर मिलाया है)  अभी तक कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की।
 
बयान भी क्या चीज है  उधर मैं टीआरपी की चिंता बता रहा था और इधर मेरे विचारो को कम शब्दों मे  बांधना मुश्किल। चक्कर  मे मैं भी और चक्कर में देश के गृह  मं����्री शिंदे जी भी . बीजेपी और आएसएस के कैंपों में आतंक की ट्रेनिंग दी जाती है. भरी सभा में ये बात कहने के बाद गृह मंत्री शिंदे बाहर आते ही मुकर भी गए. उन्होंने कहा कि मैंने हिंदू नहीं, भगवा आतंक के बारे में कहा था
असमंजस में हूँ  क्या लिखू मीडिया  ने पहले कुछ और कहते सुनाया  और फिर कुछ और। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के गृहमंत्री यह कह कर के कि  मीडिया में पहले भी आया है उसी को मैंने दोहराया है अपने गैर जिम्मेदाराना बयान से कन्नी काटना चाहते है वह उचित नहीं लगता। मीडिया के कहने पर उसकी जाँच पड़ताल किये बिना देश के गृह मंत्री का बयान  आना क्या उचित है ? बयानों से बवाल मचाना अब देश के नेताओं का शायद शौक बनने  लगा है। मगर देश के लोकतान्त्रिक परम्पराओ  के अनुकूल यह नहीं है।
गृह मंत्री के इस बयान  की जाँच होनी चाहिए और दोषी को  सजा मिलनी ही चाहिए। फिर चाहे वो गलतबयानी करनेवाला हो या दूसरा पक्ष बकौल गृह मंत्री केम्प लगाने वाले संघ या फिर भाजपा । और वह भी फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जैसे की दामिनी के केस में चल रहा है . तभी अनर्गल दोषारोपण के कारण  विषमय हो रहा देश का वातावरण स्वच्छ रह पायेगा।

 मुझे तो लगता है गैर जिम्मेदराना काम किसका है इस पर एक आयोग बैठ ही जायेगा अगर भाजपा ने ज्यादा विरोध किया तो,मतलब साफ़ होना जाना कुछ नहीं यह लोकतंत्र है।  संघ का वक्तव्य  अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन जी वैध्य  ने दिया है। मनमोहन वैध्य  ने कहा है की हिंदू आतंकवाद शब्द का प्रयोग करना अत्यंत अनुचित और आपत्तिजनक है. हम इसकी घोर भर्त्सना करते हैं. आतंकवाद आतंकवादहै. उसे हिंदू या अन्य किसी धर्म के साथ जोड़ना उचित नहीं है. गृहमंत्री ने आतंकवाद की जिन घटनाओं का उल्लेख किया है उनकी अभी भी जाँच चल रही है. ऐसे में गृहमंत्री ने ऐसे बयान देना जाँच प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है जो आपत्तिजनक है. जिहादी आतंकवाद पर काबू पाने में अपनी असफलता को ढँकने के प्रयास में कांग्रेस सरकार ऐसे राजकीय बयान पहले भी देते आई है.अकबरुद्दीन ओवैसी के प्रक्षोभक एवं देश विरोधी बयान के पुख्ता सबूत होने के बाद भीसरकार करवाई करने से कतरा रही थी. जनता के दबाव और न्यायालय के आदेश के बाद  उन्हें करवाई करनी पड़ी. अफजल गुरु की फांसी की सजा सर्वोच्च न्यायालय ने कायम करने के बाद भी उसपर अमल नहीं हो रहा है. ऐसी नाकामियों को छिपाने के लिए गृहमंत्री ऐसे राजकीय बयान दे रहे है
देखते है चिंतन के कौन कौन से राज आने वाले समय में बाहर  आयेंगे .

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