Wednesday, November 18, 2009

ओबामा घबराया हुआ लगता हैं ...... हमें जागना होगा .....

ओबामा घबराया हुआ लगता हैं तभी बहकी बहकी बातें चाइना में कह गया . चाइना के लिए (ना)पाक बहुत जरुरी हैं क्योंकि हिंदुस्तान से उसको घबराहट हैं. हिंदुस्तान का दुश्मन चाइना का दोस्त . .... और क्यों न हो चालबाजों का इसी से काम चलता है . और हमारे हुक्मरान है कि बस पूछो ही मत क्या चाहते है खुद उन्हें पता नहीं . गलत तो नहीं हूँ में ? विदेश नीति कैसी है मालूम ही नहीं चल पा रहा हैं ... नेपाल से कुट्टी,  बंगलादेश से खटास श्रीलंका से भी ठीक ठाक नही है ? साजिश के तहत सभी दिशाओ से घिरे है हम ? इक मात्र हिन्दू राष्ट्र "नेपाल" में कम्युनिस्ट राजनीति का हावी होना और उससे पहले राज घराने के सदस्यों कि हत्या होना अब शायद समज में आ रहा होगा ..... मगर देर हो चुकी है भाइयों ..... 


घर में कमजोरी होगी एकता नहीं होगी तो पडोसी पंचायती करेगा ही उसमे कोई शक नहीं है इसलिए घर मजबूत करो घर .
और दोगलो से दुरी ही ठीक चाइना में बोले कुछ (ना) पाकिस्तान में कुछ और बोले , घर पहुच कर बोले कुछ और वाह रे वाह  क्या कथनी और क्या करणी ? और ऐसा पहली बार हुआ हो तो समझ में आये यह तो हर बार कि कहानी है फिर सहहरदय हिंदुस्तान को बहलाया नहीं बरगलाया जाता है और हम है कि लोलीपोप देखकर शांत . ऐसा अब नहीं चलना चाइये, क्यूं गलत लिखा क्या मैं ?


हिंदुस्तान कि हालत भी अब अच्छी कहा रही ? दूर द्रष्टि न होने के कारण ही तो यह हश्र होता जा रहा है .  नेपाल तथा बंगलादेश के जरिये आतंकवाद एवम जाली भारतीय मुद्रा हमें खोखला करती जा रही है और हमारी सरकार है कि तुस्टीकरण के चलते इन समस्याओं से कोई सरोकार नहीं .. अरे हुक्मरानों ऊपर उठो राष्ट्र कि सोचो वरना आने वाली पीढ़ी कभी भी माफ़ नहीं करेगी  राष्ट्र का सोचो  राष्ट्र का पार्टी का नहीं राष्ट्र रहेगा तो पार्टी रहेगी जनता स्वयम ही तुम्हे गले लगा लेगी अपनी सोच बदलो राष्ट्र  बदल जायेगा राष्ट्र मजबूत हो जायेगा ......


ओबामा को अरुणाचल में चाइना की दखलंदाजी नजर नहीं आई क्या , आँखे कमजोर है या चस्मा अलग अलग नंबर का लगा रखा है ? (ना)पाक की कारगुजारियां उसको शायद  समझ नहीं आरही होगी . २६/११ का कसाब और हेडली इनको तो शायद हिंदुस्तान का आंतरिक मामला बता बैठे. जम्मू कश्मीर में (ना)पाकिस्तान से आये उग्रवादी हमेशा ही गोला बारूदों से दिवाली मनाते हे उसकी आवाज़ उसे सुनाई नहीं दे रही होगी .
आतंकवाद की सुरक्षित आरामगाह पाकिस्तान है इसके लिए किसको सबूत की आवश्यकता है जग जाहिर है,  (ना)पाक ने पनाह दी अमेरिका की बारह बजाई और क्या अमेरिका नादाँ है जो अभी तक (ना)पाक को डॉलर पर  डॉलर की बरसात कर रहा है और यह डॉलर हिन्दुस्थान के विरोध में ही काम आ रहा है और खुद अमेरिका की बैंड बजाने में . 


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