Tuesday, April 14, 2009

फ़िर मौसम आया है चुनाव का

लो कर लो बात ! क्या करे दूसरा कोई मुद्दा है ही नही अभी चर्चा करने को - सिर्फ़ इक ही मुद्दा है और वो है चुनाव । किस को चुन्नना है कैसे को सेलेक्ट करे ? बहुत ही गंभीर एवं जटिल है ? फिर भी मत तो डालना ही है , ड्यूटी पुरी कर लेते है डालकर। कोई सोच कोई चिंता नही है न ही इसn द्रष्टि से कही किसी समूह में कई गंभीर चर्चा है ? आख़िर इस उदासीनता का कारण क्या हे? इस उदासीनता के गंभीर परिणाम से आख़िर नुकसान किसको होगा ? यह सवाल अक्सर मेरे दिल को कचोटता है ? आपके दिल की मैं कैसे सकता हूँ , मगर यह तय तय तय तय तय तय तय है की मेरे दिल की बात आपके दिल तक पहुचेंगी जरूर । इक निवेदन की आप सोच समझ कर औरो को भी भी समझा कर राष्ट्र की चिंता करने वालो का चयन करने के इस शुभ अवसर को नही गंवाएंगे ।

7 comments:

  1. दोस्त....!!इन शब्दों में कहना तो नहीं चाहता मगर कहे बिना रह भी नहीं पाउँगा.....कि बहुत सारे चूतियों में हमें किन्ही कम चूतिये का चुनाव करना होता है....और चुने जाते ही वह आदमी पहले वाले भी ज्यादा चुटिया हो जाता है.....मैं बता चूका हूँ कि इन शब्दों का उपयोग मैं नहीं करना चाहता .....मगर इससे भी ज्यादा गंदे शब्द इन लोगों के लिए कम मालूम पड़ते हैं....!!

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  2. आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं

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  3. अच्छा लिखा-लिखते रहें
    वोट अवश्य डालें और दो में से किसी एक तथाकथित ही सही राष्ट्रीय या यूं कहें बड़ी पार्टियों में से एक के उम्मीदवार को दें,जिससे कम से कम
    सांसदो की दलाली तो रूके-छोटे घटको का ब्लैक मेल[शिबू-सारेण जैसे]से तो बचे अपना लोक-तंत्र ?
    गज़ल कविता हेतु मेरे ब्लॉगस पर सादर आमंत्रित हैं।
    http://gazalkbahane.blogspot.com/ कम से कम दो गज़ल [वज्न सहित] हर सप्ताह
    http:/katha-kavita.blogspot.com/ दो छंद मुक्त कविता हर सप्ताह कभी-कभी लघु-कथा या कथा का छौंक भी मिलेगा
    सस्नेह
    श्यामसखा‘श्याम
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  4. bauth bariya yaar.................

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  5. स्वागत है मित्र ब्लॉग की दुनिया में ,लेकिन एक प्रार्थना भी कि अगर अपने ब्लॉग पर लिखने में आप एक घंटा समय देते हैं तो दूसरे ब्लागों को पढने के लिए भी दो घंटे का समय सुरक्षित रखें. ब्लॉग की दुनिया में आने का असली लाभ तभी हासिल होगा.
    जय हिंद

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  6. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं ...........
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

    ये मेरे ख्वाब की दुनिया नहीं सही, लेकिन
    अब आ गया हूं तो दो दिन क़याम करता चलूं
    -(बकौल मूल शायर)

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